मैं दरकता दरख्त हूं...
मेरी शाखों पर आज भी...
गुनगुनाती है धूप...
पतझड मेरी ही टहनियों पर...
इठलाती है...गाती है '
मेरे कंधों पर आज भी...
बादल खेलते हैं...
दूर कहीं बारिश होती है,,,
मैं भीग जाता हूं....
मैं सहमा सहमा सा...
आंधी का इंतजार करता हूं...
जाने कब मेरी शाखों पर...
कोपलें कांपेंगी...
सवेरा होने को है....
रात ढलने को है...
तारे सूरज में बदलने को तैयार हैं...
मुझे तो सिर्फ मौसम के....
बदलने का इंतजार है...