Tuesday, 8 November 2011

मार दिए जाओगे....

मत देखो सपने,
वरना मार दिए जाओगे....
समय की कोख में ही...
होगी तुम्‍हारी दिन दहाडे हत्‍या....
कुछ भी अलग करने की कोशिशें मत करो...
वरना...
दुनिया से ही अलग..थलग पड जाओगे।
कौन सुनेगा तुम्‍हारी दमघोंटू सि‍सकियां...
किसको वेधेंगी तुम्‍हारी कराहें...
वह भी तब कि जब...
यहां हर चीज बिकती है....
यहां तक कि तुम्‍हारी वेदनाएं भी।
सोचो...कौन रोएगा तुम्‍हारी मौत पर...
अब लोगों की आंखों से आंसू नहीं आते...
इसीलिए कहता हूं...
मत देखो सपने...
वरना सरेआम मार दिए जाओगे।
और वैसे भी तुम्‍हे सपने देखने का हक नहीं है...
क्‍योकि तुम हो आम आदमी...
और आम आदमी के पास सपना नहीं...
पेट होना चाहिए....

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