मैं जब भी रात को सोने की कोशिश करता हूं,
मुझे रात के सन्नाटे में जापान का जलजला,
दहाडता हुआ नजर आता है।
उगते सूरज के देश में,
अब अंधेरा ही अंधेरा नजर आता है।
या शायद----
lसुनामी में डूबा सूरज नजर आता है।
.हर तरफ मौत की बाहें पसारे,
सुनामी की लहरें।
और लहरों पर बिखरे हुए सपने,
बिछुडे हुए रिश्ते,
बनाई हुईं बुनियादें
नजर आती हैं।
बडी बेबस और बेरहम
नजर आती जिंदगी,
कागज की तरह बहती हुई,
यहां वहां भीगी भीगी सी नजर आती है।
भूकंप से हिलती इमारतों के बीच,
बदहवास सी जिंदगी,
सहमी सहमी सी बेजार नजर आती है।
अंधेरे में फंसे बच्चे, बूढे, औरतें सभी
तलाशते हैं एक और दुनिया शायद अंधेरे में ही-----
न मालूम कैसी कैसी है ये दुनिया।
सपनों के टूटने,
अपनों से बिछडने की दुनिया।
सुनामी में बहे आंसूओं से उबलती लहरें,
हर दरख्त पर निशान है,
एक विनाशकारी दुनिया का।
एक और हिरोशिमा, नागासाकी की,
सुगबुगाहट , बुदबुदाहट तो नहीं।
ये अंत नहीं----
कहीं एक नई दुनिया की शुरुआत तो नहीं----।
रात के अंधेरे में सपने में,
अकसर मुझे जापान का जलजला याद आता है।
ऐसे में मैं फिर से नई दुनिया तलाशता हूं।
जब भी रात को सोने की कोशिश करता हूं,
मुझे रात के सन्नाटे में जापान का जलजला,
दहाडता हुआ नजर आता है।
उगते सूरज के देश में,
अब अंधेरा ही अंधेरा नजर आता है।
शायद-------नए सूरज के निकलने तक ।
मुझे रात के सन्नाटे में जापान का जलजला,
दहाडता हुआ नजर आता है।
उगते सूरज के देश में,
अब अंधेरा ही अंधेरा नजर आता है।
या शायद----
lसुनामी में डूबा सूरज नजर आता है।
.हर तरफ मौत की बाहें पसारे,
सुनामी की लहरें।
और लहरों पर बिखरे हुए सपने,
बिछुडे हुए रिश्ते,
बनाई हुईं बुनियादें
नजर आती हैं।
बडी बेबस और बेरहम
नजर आती जिंदगी,
कागज की तरह बहती हुई,
यहां वहां भीगी भीगी सी नजर आती है।
भूकंप से हिलती इमारतों के बीच,
बदहवास सी जिंदगी,
सहमी सहमी सी बेजार नजर आती है।
अंधेरे में फंसे बच्चे, बूढे, औरतें सभी
तलाशते हैं एक और दुनिया शायद अंधेरे में ही-----
न मालूम कैसी कैसी है ये दुनिया।
सपनों के टूटने,
अपनों से बिछडने की दुनिया।
सुनामी में बहे आंसूओं से उबलती लहरें,
हर दरख्त पर निशान है,
एक विनाशकारी दुनिया का।
एक और हिरोशिमा, नागासाकी की,
सुगबुगाहट , बुदबुदाहट तो नहीं।
ये अंत नहीं----
कहीं एक नई दुनिया की शुरुआत तो नहीं----।
रात के अंधेरे में सपने में,
अकसर मुझे जापान का जलजला याद आता है।
ऐसे में मैं फिर से नई दुनिया तलाशता हूं।
जब भी रात को सोने की कोशिश करता हूं,
मुझे रात के सन्नाटे में जापान का जलजला,
दहाडता हुआ नजर आता है।
उगते सूरज के देश में,
अब अंधेरा ही अंधेरा नजर आता है।
शायद-------नए सूरज के निकलने तक ।
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